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Interview With The Author Of "Bhoota Gappa" Horror Book Series & "Bhoota Gappa 3" Made Affordable & The Challenges Of Reading Books Being Obsolete

2 मिनट हॉरर स्टोरीज़ अब हिंदी में रोज़ एक! केवल मेरे हिंदी पाठकों के लिए - "The Broken Toe"

  तेज़ तूफ़ान वाली रात थी और मुझे होटल के कमरे में ही रुकना पड़ा। सुबह जल्दी फ्लाइट थी, इसलिए तूफ़ान के थमने का इंतज़ार कर रहा था ताकि हाईवे ढाबे से कुछ खा सकूँ। तभी अचानक दरवाज़े पर दस्तक हुई। खोला तो बाहर कोई नहीं। कुछ देर बाद फिर दस्तक—इस बार खिड़की पर। बारिश के पानी के बीच बस किसी उँगली की झलक दिखी, इंसान साफ़ नहीं दिख रहा था। अचानक बारिश रुक गई। मैं रेनकोट पहनकर बाहर निकला तो हॉलवे में खून की बूँदें दिखीं, जैसे किसी का अंग तेज़ हथियार से कट गया हो। फ्रंट डेस्क पर एक लड़की दर्द में थी, पैरामेडिक उसे देख रहा था। मैं घबराकर गाड़ी की ओर भागा, लेकिन रिवर्स करते समय कुछ फँसा हुआ लगा। बाहर निकला तो ज़मीन पर खून से सनी एक टूटी हुई पैर की उँगली पड़ी थी। डर के मारे मैं अंदर भागा—लेकिन फ्रंट डेस्क खाली थी। तभी लाइट चली गई। अँधेरे में कुछ दरवाज़े से अंदर आया और मेरी पैर की उँगली के पास आकर हल्के से थपथपाने लगा, जैसे मुझे बुला रहा हो। मैं पसीने से भीग गया, हिल भी नहीं पाया। अचानक लाइट आ गई। फ्रंट डेस्क वाली लड़की लौटी और बोली—यह कमरा छोड़ दीजिए, यहाँ ठहरने वालों को या तो सुबह पैर की उँगली...

नई 2-मिनट हिंदी हॉरर स्टोरी अब लाइव सिर्फ़ Bhoota Gappa पर। - "It Was My Wedding Day"

 मेरी शादी का दिन था। जिस इंसान के साथ पूरी ज़िंदगी बितानी थी, उससे आज मेरा विवाह होने वाला था। मैं खुश था… या शायद होना चाहिए था। मुझे अंदाज़ा नहीं था कि वह रात मेरे लिए क्या लेकर आएगी—जब तक मैंने उसे नहीं देखा। वह जानी-पहचानी लगी। बहुत ज़्यादा। पर क्या अब बहुत देर हो चुकी थी? अजीब बात यह थी कि मैं उसे देख रहा था, लेकिन कोई और नहीं। दोस्तों ने कहा—घबराहट है, शादी कर लो, दिमाग़ खेल कर रहा है। तभी वह एक पल में मेरे और क़रीब आ गई। उसने मेरी आँखों में देखा और कहा— “तुम ऐसा नहीं कर सकते।” वह दो साल पहले मर चुकी थी। लेकिन वह मुझमें ही रहती है—यह सोच डरावनी थी। अचानक मुझे उसका अंतिम संस्कार याद आया। भीड़, आग, आँसू… और वही पल, जब उसने मेरा हाथ थामकर वादा किया था— “मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाऊँगी।” Visit Bhoota Gappa

भूता गप्पा – अब हिंदी में उपलब्ध amazon पर - "The Chair Outside The Window"

 हमारा परिवार शहर के बाहरी इलाके में एक छोटे कस्बे के पास बने सरकारी घर में रहने आया। पिताजी सरकारी डॉक्टर थे, इसलिए घर अधिकारियों द्वारा तय किया गया था, लेकिन हमेशा की तरह साफ-सुथरा और सजा हुआ मिला। मैं और मेरा भाई बच्चों की तरह हर कमरे और बड़े से पिछवाड़े की खोजबीन करने लगे। रात होते ही मेरी नज़र खिड़की के बाहर आँगन में रखी एक पुरानी, धूल और जालों से ढकी कुर्सी पर पड़ी—वह किसी पुराने ज़माने की लग रही थी। आधी रात को प्यास लगी तो पानी लेने उठा, तभी खिड़की की ओर देखा—ऐसा लगा जैसे उस कुर्सी पर कोई बैठा हो। थका हुआ समझकर मैंने इसे सपना मान लिया। अगले दिन पिताजी से पूछा तो उन्होंने कहा कि वे जल्दी सो गए थे, कोई आया ही नहीं। अगली रात मैंने भाई को अपने साथ सुलाने की कोशिश की, पर वह गहरी नींद में था। फिर वही दृश्य—कुर्सी पर कोई बैठा था। हिम्मत जुटाकर मैं परदे के पीछे छिपकर पास गया। बाहर अंधेरा और हल्का कोहरा था, फिर भी वह आकृति स्थिर बैठी दिख रही थी। डरते हुए मैंने दरवाज़ा खोला, हाथ में बैट था, और लाइट जलाई—“कौन हो तुम?” चीख पड़ा। वहाँ कोई नहीं था, सिर्फ़ खाली कुर्सी। लेकिन इस बार कुर्सी ...
Ashvath
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The wolf who walks between worlds. The father who never truly left.
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